एक माँ की नजर: एक व्यस्त हाट (बाजार) में एक सार्वभौमिक बंधन की झलक

 

एक माँ की नजर: एक व्यस्त हाट (बाजार) में एक सार्वभौमिक बंधन की झलक
#झारखंड #मातृत्व

यह तस्वीर झारखंड, भारत के एक जीवंत ग्रामीण हाट में घूमते समय ली गई थी। यह एक कालातीत क्षण को कैद करती हैएक माँ और बच्चा, जिनकी नजरें मेरी कैमरा लेंस पर जमी हुई हैं।

उनके चेहरे के भाव, जो लंबे ज़ूम लेंस से समय में थम से गए हैं, खोज की उस अद्भुत भावना को दर्शाते हैं जो हर इंसान के भीतर होती है। भीड़-भाड़ भरा बाजार पीछे छूट जाता है, और बस उनके बीच का अंतरंग संबंध ही रह जाता है।

यह मुलाकात एक गहरे विचार को जन्म देती हैकि एक माँ का अपने बच्चे के जीवन पर कितना गहरा प्रभाव होता है। माँ ही सबसे पहला सहारा होती हैं, पहली शिक्षिका होती हैं, और अडिग समर्थन की स्तंभ होती हैं। वे हमें जीवन की हर मोड़ पर मार्गदर्शन देती हैं, हमारे भावनात्मक स्वास्थ्य और मजबूती की नींव रखती हैं।

हाथ का कोमल स्पर्श हो या उनकी आवाज़ की सुकून देने वाली मिठासमाँ की उपस्थिति हमें आकार देती है। उनका प्रेम और देखभाल एक स्वस्थ भविष्य की नींव रखते हैंऐसा भविष्य जो जागरूकता, करुणा और अपनत्व से भरा हो।

यह तस्वीर इस असाधारण बंधन की याद दिलाती हैएक ऐसा बंधन जो भाषा और संस्कृति से परे है।

पाठ्य और चित्र: अशोक करन
वेबसाइट: ashokkaran.blogspot.com


कृपया नीचे टिप्पणियों में माँ और बच्चे के इस विशेष बंधन से जुड़ी अपनी भावनाएँ और कहानियाँ साझा

 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पाक-कला – घर का स्नेह, स्वाद का अनोखा संगम

The Growing Menace of Mobile Addiction in Children

फ्लिंडर्स स्ट्रीट रेलवे स्टेशन – मंदिर जैसी खूबसूरती से सजा एक शानदार स्थल